कृषि बिल, किसान और गरीब विरोधी, पूंजीपतियों के लिए लाभकारी – मनोहर यादव, राजद नेता

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कृषि बिल, किसान और गरीब विरोधी, पूंजीपतियों के लिए लाभकारी – मनोहर यादव, राजद नेता

महागठबंधन ने किया भारत बंद का समर्थन, सड़कें रही जाम, जुलूस में लगते रहे सरकार विरोधी नारे

ANA/A.K.Verma

खगड़िया। किसान संगठन द्वारा तीन काला कृषि बिल के विरोध में भारत बंद का आह्वान किया गया। खगड़िया में महागठबंधन के द्वारा भारत बंद का समर्थन किया गया और अलौली राजद विधायक रामवृक्ष सदा ,पूर्व नगर सभापति सह राजद नेता मनोहर कुमार यादव, राजद जिलाध्यक्ष कुमार रंजन पप्पू और आपदा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रमोद यादव के नेतृत्व में राजद बलुआही बस स्टैंड के पास एन एच 31 को जाम किया गया और काला कृषि कानून बिल वापस लो का नारा लगाते रहे इसके बाद एम जी मार्ग में दुकान को बंद कराते हुए पूरे शहर का भ्रमण करते हुए राजेंद्र चौक पर पहुँचकर घंटों जाम कर दिया। ट्रक, टैम्पू और ई रिक्शा की लंबी कतार लग गई। राजद कार्यकर्ताओं द्वारा एम्बुलेंस को रास्ता दिया गया। मेडिकल की दुकानों को खुला रखा गया। बन्द समर्थकों का जुलूस राजेंद्र चौक पर पहुँचकर सभा में तब्दील हो गई और सभा को संबोधित करते हुए विधायक रामवृक्ष सदा ने कहा कि किसान द्वारा बुलाये गए भारत बंद का समर्थन महागठबंधन द्वारा किया गया है हमलोग राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और हमलोगों के नेता तेजस्वी यादव के आह्वान पर खगड़िया में भारत बंद का समर्थन किये हैं। किसान का जो तीन काला कानून बिल लाया गया है यह किसान विरोधी है। ये बिल अडानी और अम्बानी को लाभ पहुँचाने को लेकर लाया गया है इस बिल से किसानों का कोई भला नहीं होने वाला है।इस बिल के द्वारा भारत सरकार किसानों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने का षडयंत्र है। अगर यह बिल किसानों के हक में रहती तो पिछले दस ग्यारह महीनों से किसान हजारों की संख्या में अपना घर छोड़कर सड़क में आंदोलन नहीं करते। हमलोग इस बिल के विरोध करते हुए इस बिल को वापस लेने की माँग करते हैं।पूर्व नगर सभापति मनोहर कुमार यादव ने कहा कि यह कृषि बिल किसान विरोधी तो है ही गरीब विरोधी भी है। इस बिल में किसान के हित में दिखाते हुए बड़े- बड़े पूंजीपतियों अडानी और अम्बानी जैसे जैसे बड़ी कंपनियों को लाभ पहुंचाना है। इस बिल में आलू,प्याज, दहलन, तेलहन को यह कहकर आवश्यक वस्तु अधिनियम से हटा रही है कि किसान अपने खेतों में उपजाए अनाज का भंडारण कर सकेंगे और ऊंची कीमत मिलने पर इसको बाजार में बेच सकेंगे लेकिन होगा ठीक इसका उल्टा किसान को रहने के लिए तो बढ़िया घर नहीं है। अनाज भंडारण के लिए गोदाम कहाँ है।इस आवश्यक वस्तु अधिनियम से आलू,प्याज ,दहलन और तेलहन का फसल बड़ी बड़ी कम्पनियों द्वारा किसानों से कम कीमत में खरीद कर गोदाम में जमाखोरी करेंगे और बाजार में इन सामानों का किल्लत दिखा कर ऊंचे दामों पर बेचेंगे। इससे तो किसान को कोई लाभ नहीं मिलेगा लेकिन गरीब लोगों को परेशानी होगा उनको भूखे प्यासे मरना पड़ेगा। कृषि बिल अभी पास होने की प्रक्रिया में है और अडानी जैसे कंपनियों का कई राज्य में बड़ा बड़ा गोदाम बन कर तैयार है।अब बताइए इन आवश्यक चीजों को आवश्यक वस्तु अधिनियम से हटाने पर किसे लाभ होगा किसान को या बड़ी कंपनियों को। चौथा, एसेंशियल कमोडिटीज एक्ट 1955 के हट जाने के बाद अब व्यापारी इन फसलों की जमाखोरी कर सकेंगे और जब चाहे महंगाई को नियंत्रित कर सकेंगे। एक तरीके से यह पूंजीपतियों के हाथ में अर्थव्यवस्था का नियंत्रित होना है। भारत में 80% से अधिक छोटे और मझोले किसान है, अर्थात इनके पास 2 हेक्टेयर से कम भूमि है। इससे उनका काफ़ी नुक़सान होगा। पांचवा, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से बड़े-बड़े पूंजीपति जमीन खरीदेंगे और किसानों से कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कराएंगे, इससे वे औने पौने दामों पर किसानों से जमीन लेंगे और अंग्रेजी के अक्षरों में समझौते कर आएंगे जो कि किसानों को समझ नहीं आता है। ऐसे उदाहरण पूरे भारतवर्ष में देखे गए हैं, जहां पर समझौते के नाम पर किसानों का शोषण किया गया है। इसके अलावा इन विधेयकों में जो भूमिहीन किसान हैं जो दलित समुदाय से आते हैं और लावणी करते हैं अर्थात किसान की जमीन की कटाई सिंचाई करते हैं तो उसका कुछ हिस्सा ले लेते हैं तो इससे दलितों की स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। राजद जिलाध्यक्ष कुमार रंजन पप्पू ने कहा कि एक सबसे आवश्यक मुद्दा किसानों द्वारा उठाया गया है, जिसे केंन्द्र सरकार को ध्यान में लेना चाहिए और उसके लिए प्रबंध करना चाहिए। किसान कहते हैं की अगर कोई प्राइवेट कंपनी करार के बाद दिवालिया हो गयी या कंपनी को मनचाहा फसल न मिला तो क्या होगा? करारनामा भले ही किया गया हो लेकिन अगर कंपनी किसी कानून का उल्लंघन करती है तो एक सामान्य किसान उस बड़ी कंपनी के खिलाफ कैसे केस लड़ सकेगा? बन्दी में मुख्य रूप से राजद प्रखंड अध्यक्ष विवेकानंद यादव, जिला राजद प्रवक्ता संजय कुशवाहा, अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष जुल्फिकार अली, पूर्व नगर पार्षद पप्पू यादव, राजद नेता बिनोद कुमार उर्फ गुग्गु यादव, सुरेश पोद्दार, नीरज यादव,प्रकाश राम,पूर्व जिला परिषद सदस्य अजीत सरकार,नगर पार्षद सह राजद नेता रणवीर कुमार, चंद्रशेखर कुमार, दीपक चंद्रवंशी, सुनील चौरसिया, अमित भास्कर, निरंजन पासवान, कुंजबिहारी पासवान,गोविन्द पासवान,प्रिंस यादव , अमृत राज, युवा राजद नगर अध्यक्ष विक्की आर्या, सन्नी चंद्रवंशी, आमिर खान, सर्वजीत पांडे, रामदेव यादव, छात्र नेता रौशन कुमार, कोशी कॉलेज छात्र संघ कोषाध्यक्ष राजा कुमार सहित सैकड़ों कार्यकर्ता थे।

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