चुनावी वर्ष में बरसाती मेंढकों की टरटराहट शुरू, निशिकांत सिंहा की सभा में मछली भात पर टूट पड़े लोग

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चुनावी वर्ष में बरसाती मेंढकों की टरटराहट शुरू, निशिकांत सिंहा की सभा में मछली भात पर टूट पड़े लोग

फसल लगाओ एकबार, फसल काटो पांच पांच बार

ANA/Arvind Verma 

खगड़िया। चुनावी वर्ष में बरसाती मेंढकों की टरटराहट शुरू हो गई। हर कोई बिहार को बदलने की चाहत को लेकर बिहार के विभिन्न ज़िलों, कस्बों में घूमते हैं। अपने आपको बिहार की तकदीर को बदलने वाले मसीहा साबित कराने हेतु गांव गांव से लोगों को बसों, जीपों, ट्रैक्टरों, टेंपुओं में भर भर कर पूर्व निर्धारित सभा स्थल पर लाते हैं। टैंट हाउस से दर्शकों को बैठने बैठाने के लिए हजारों हज़ार कुर्सियां लगाई जाती है। भले ही कुर्सियां खाली ही क्यों नहीं रह जाय। इतना ही नहीं, सभा स्थल पर उपस्थित दर्शकों के लिए भोजन की व्यवस्था भी की जा रही है। सारे कार्य इवेंट मैनेजमेंट के तहत हो रहा है। आजकल इवेंट मैनेजमेंट के मालिकों और प्रबंधकों की चांदी कट रही है। सबसे मजे में वो नेता रहते हैं जिन्हें भीड़ जुटाने से लेकर भीड़ को सभा समाप्ति के बाद सभा स्थल से उनके घर तक वापस पहुंचाने का जिम्मा होता है। बस, टैंपो, जीप, मोटरसाइकिल आदि वाहनों तथा ईंधन की व्यवस्था तक करनी पड़ती है। अब बताइए, इतने सारे कार्यों को अंजाम देने में लाखों लाख रुपए खर्च तो हो ही जायेंगे। कहां से आता है लाखों लाख रुपए ? बिहार में मसीहा बनने को ललायित इन नेताओं द्वारा पानी की तरह दौलत बहाया जा रहा है। पुष्पम प्रिया आई, प्रशांत किशोर आए और अब लंबी छलांग लगाने को बेताब निशिकांत सिंहा भी चुनाव की तैयारी हेतु बिहार में इंट्री लगाए हैं। इसी को लेकर निशिकांत सिंहा ने कोशी कॉलेज के मैदान में भीड़ इकठ्ठा की। लगभग तीस हज़ार लोगों के लिए मछली भात की व्यवस्था की गई। लोग टूट पड़े मछली भात पर। किसी किसी के प्लेट में चावल है, तो मछली नहीं और किसी किसी के प्लेट में मछली है तो चावल नहीं। अब, राजनीति करने वाले नेता करोड़ों करोड़ रुपए दाव पर लगा देते हैं। एक प्रकार से जुआ ही तो खेलते हैं। उन्हें पता है, एक बार चुनावी मैदान में फसल लगाओ और अगर लॉटरी लग गई अर्थात चुनाव जीत गए तो पांच वर्षों तक फसल काटते रहो। उनकी तो बल्ले बल्ले हो जाती है। प्रतिष्ठा के साथ साथ अच्छी कमाई भी होती रहती है। जैसा कि प्रचारित किया गया कि हमारे नेता ठेकेदार हैं, उद्योगपति हैं। इसलिए निशिकांत सिंहा भी अपनी किस्मत की आजमाईश कर रहे हैं । आगे आगे देखिए होता है क्या ? शायद इसीलिए जन संवाद कार्यक्रम में कुशवाहा समाज के बड़े बड़े ठीकेदार मंच पर नज़र आ रहे थे।

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