व्याहुत कलवार के कुल देवता भगवान बलभद्र के आदर्शों पर चलें -अजय वर्मा, अध्यक्ष

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व्याहुत कलवार के कुल देवता भगवान बलभद्र के आदर्शों पर चलें -अजय वर्मा, अध्यक्ष

जैन धर्मशाला में बलभद्र जयंती समारोह में कलवार बंधुओं ने एकजुटता दिखाई

ANA/S.A.Verma

मुंगेर। श्री श्री 108 बलभद्र पूजा समिति, मुंगेर तथा अखिल भारतीय कलवार एवं जायसवाल महासंघ, मुंगेर के तत्वावधान में बलभद्र जयंती समारोह हर्षोल्लास के साथ कलवार एवं जायसवाल दोनों वर्ग की ओर से जैन धर्मशाला मुंगेर में सम्पन्न हुआ जिसमें सभी लोगों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया । मौके पर अध्यक्ष अजय कुमार वर्मा, उपाध्यक्ष उमेश कुमार भगत, सचिव राकेश कुमार भगत (लडडू) उप सचिव नन्दन जायसवाल, कोषाध्यक्ष मनोज जायसवाल एवं दीपक जायसवाल, संरक्षक – फूलेन्द्र चौधरी (राष्ट्रपति पुरुस्कार से सम्मानित), कृष्ण मोहन प्रसाद भगत, नवल किशोर प्रसाद भगत, डॉ०जीवन भगत, डॉ० गगन प्रसाद भगत, अमरनाथ भगत, कार्यकारणी के सदस्य – दिलीप भगत, राहुल कुमार राज, अमित भास्कर, वसन्त गौरव, मनोज भगत ,राजीव भगत, प्रभात कुमार भगत, गणेश भगत, गोरखनाथ भगत, अतूल जायसवाल, मोनू जायसवाल, भरत जायसवाल, राजू भगत, पूनम कुमारी, रेणुका भगत, अलका कुमारी, ज्ञानवती कुमारी, मधु सिंह ने सम्मेलन में अपने अपने विचार प्रकट करते हुए बहुमूल्य योगदान एवं एकता का परिचय दिया और संगठन को मजबूत बनाने का संकल्प लिया। अध्यक्ष अजय वर्मा ने मीडिया से कहा बलभद्र पूजन समारोह भगवान बलभद्र की पूजा से संबंधित एक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है, जो विशेष रूप से ब्याहुत कलवार समाज द्वारा आयोजित किया जाता है। इस समारोह का उद्देश्य विवाह जैसे मंगल कार्यों को निर्विघ्न और शुभ बनाने के लिए भगवान बलभद्र से आशीर्वाद प्राप्त करना है, क्योंकि उन्हें समाज का कुल देवता माना जाता है। यह आयोजन परंपरा, कृषक संस्कृति, और कुल मर्यादा को जोड़ता है। बलभद्र पूजन समारोह का महत्व धार्मिक अनुष्ठान: यह एक धार्मिक अनुष्ठान है जिसमें भगवान बलभद्र और उनकी पत्नी माता रेवती को आमंत्रित करके पूजा की जाती है। सांस्कृतिक धरोहर: इसे एक सांस्कृतिक धरोहर के रूप में देखा जाता है जो प्रेम, परंपरा और आशीर्वाद को बढ़ावा देती है। कुल देवता की पूजा: कलवार समाज में, भगवान बलभद्र को कुल देवता के रूप में पूजा जाता है, और यह समारोह उनके प्रति सम्मान व्यक्त करता है। समारोह का उद्देश्य विवाह में बाधा निवारण: इस पूजा का मुख्य उद्देश्य विवाह जैसे मंगल कार्यों को निर्विघ्न और मंगलमय बनाना होता है। आशीर्वाद की प्राप्ति:भक्त भगवान बलभद्र से अच्छी फसल, समृद्धि और शुभ फलदायक जीवन के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।पूजा विधि (सामान्य चरण) आवाहन: सर्वप्रथम, फूल और अक्षत लेकर भगवान बलभद्र और माता रेवती को पूजा में आने का निमंत्रण दिया जाता है। मंत्र जाप: “ॐ बलभद्राय नमः” और “ॐ रेवत्यै नमः” का जाप किया जाता है। ध्यान:आह्वान के बाद, थोड़ी देर मौन रहकर देवताओं के सन्निधि में होने का ध्यान किया जाता है।

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