एकता स्वतंत्रता देश की ज्वलंत आशा, एक देश एक राष्ट्र एक राष्ट्रभाषा !’

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एकता स्वतंत्रता देश की ज्वलंत आशा, एक देश एक राष्ट्र एक राष्ट्रभाषा !’

विद्यालय के नन्हें-मुन्हें बच्चों ने जयंती पर याद किया राष्ट्रकवि गोपाल सिंह ‘नेपाली’ को

ANA/Ajay Jaiswal

गढ़पुरा-बेगूसराय (बिहार)। स्थानीय बधिया कोरई अवस्थित ‘नव प्राथमिक विद्यालय’ में ‘शब्दयात्रा भागलपुर’ के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर कविवर गोपाल सिंह ‘नेपाली’ की ११४वीं जयंती समारोह का आयोजन किया गया । अध्यक्षता करते हुए विद्यालय के साहित्य प्रेमी प्रधानाध्यापक रणधीर कुमार ने कहा – राष्ट्रकवि गोपाल सिंह नेपाली के गीत आज भी सुनने वालों के मन-प्राणों को अभिभूत कर जाते हैं ।
विद्यालय की हिंदी शिक्षिका जानी-मानी कवयित्री बबिता कुमारी ने कहा – नेपाली जी का जन्म ११ अगस्त १९११ को‌ पश्चिम चम्पारण बिहार के बेतिया में हुआ था और निधन १७ अप्रैल १९६३ को कहलगांव के एकचारी से भागलपुर आते समय ट्रेन में संदेहावस्ता में हो गई थी । आगे उन्हीं के संयोजन-संचालन में, कक्षा प्रथम-से-पँचम वर्ग के नन्हें-मुन्हें बच्चों ने काफी उत्साहजनक माहौल में नेपाली जी के एक-से-एक सुमधुर गीतों को सुनाकर विद्यालय प्राशाल को देशभक्ति से‌ ओत-प्रोत कर दिया । जैसे -असीमा कुमारी ने

सुनाया – ‘हो कान पवित्र इसी सुर में, इसमें ही हृदय तड़पने दो, हिंदी है भारत कि बोली, तो अपने आप पनपने दो !’
नंदनी कुमारी ने – ‘एकता स्वतंत्रता देश की ज्वलंत आशा, एक देश,‌ एक राष्ट्र एक, राष्ट्रभाषा !’चंदा कुमारी – ‘बैरी दुआरे आये तुम सिर उतारो जागो, भारत के प्यारे जागो सोये सितारों जागो !’लक्ष्मी कुमारी – ‘संसार भी अगर कहीं मुकाबला करें, तुम सामना करो, समर्थ सामना करो, तुम कल्पना करो नवीन कल्पना करो !’खुशी कुमारी – ‘सोचो कि हम पर हमला हरदम होता ही क्यों है, हँसती है सारी दुनिया भारत रोता ही क्यों है ?’आरुषि‌ कुमारी ने राष्ट्र के प्रति कविवर गोपाल सिंह ‘नेपाली’ की प्रतिबद्धता दर्शीती उनकी कविता – ‘पंद्रह अगस्त के दिन थी जिसकी नींव पड़ी, उस प्रजातंत्र की रखवाली में कलम खड़ी, ना मानो तो विश्वास बदलने वाले हैं, हम तो कवि हैं इतिहास बदलने वाले हैं !’‌ को सुनाया ।अंशुमला कुमारी – ‘ओ राही दिल्ली जाना तो कहना अपनी सरकार से, चर्खा चलता है हाथों से शासन चलता तलवार से !’कृष्ण कुमार – ‘तू चिंगारी बनकर उड़ री, जाग-जाग मैं ज्वाल बनूं, तू बन जा हहराती गंगा मैं झेलम बेहाल बनूं !’भविष्य‌ कुमार – ‘आज बसंती चोला तेरा, मैं भी सज लूं लाल बनूं, तू भगिनी बन क्रांति कराली, मैं भाई विकराल बनूं !’ – आदि । मन को पुलकित कर देने वाले इस आयोजन में प्रधानाध्यापक रणधीर कुमार सहित सोहन पासवान, विवेकानंद विवेक, आरती कुमारी, बबिता कुमारी आदि शिक्षक एवं शिक्षिकाओं की सार्थक उपस्थित रही । समापन तालियों कि गड़गड़ाहट से हुआ।

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