नीतीश कुमार ने 48 वर्ष पूर्व युवा पत्रकार अरविन्द वर्मा के नाम क्यों लिखा था पत्र ?

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डॉ अरविन्द वर्मा, चेयरमैन बिहारी पॉवर ऑफ इंडिया

नीतीश कुमार ने 48 वर्ष पूर्व युवा पत्रकार अरविन्द वर्मा के नाम क्यों लिखा था पत्र ?

नीतीश कुमार की आदत रही है वो जो कहते हैं, करते हैं प्रमाणस्वरुप उनका लिखा पत्र मेरे नाम आज भी सुरक्षित – डॉ अरविन्द वर्मा

ANA/Indu Prabha

खगड़िया। नीतीश कुमार ने वर्षों पूर्व आखिर युवा पत्रकार अरविन्द वर्मा को क्यों लिखा पत्र ? बिहारी पॉवर ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ अरविन्द वर्मा (वरिष्ठए पत्रकार) ने एक विशेष भेंट में मीडिया से कहा आज से 48 वर्ष पूर्व नीतीश कुमार (वर्तमान में मुख्य मंत्री बिहार सरकार) अखिल भारतीय युवा जनता, नई दिल्ली के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य के रूप में पटना से मुझे (अरविन्द वर्मा) एक पत्र

नीतीश कुमार का पत्र अरविन्द वर्मा, पत्रकार के नाम, दिनांक – 16 मार्च 1978

(16/3/78) लिखा, जिसमें उन्होंने कहा प्रिय अरविन्द जी, आपका पत्र मिला। 23 मार्च आऊंगा। आपलोग तो 18 मार्च को तो पटना आयेंगे ही। आशा है पत्र के पहुंचने के पहले ही पटना चले आयेंगे। मैं पटना से बस से चलकर महेशखूंट होतेहुए पहुंच जाऊंगा। शिवानंद भाई भी आयेंगे। शुभकामनाओं सहित। वर्षों रखे रखे कुछ भाग दीमक चट कर गया। जो भी बचा वो ऐतिहासिक बन गया। दरअसल, मैं ने 23 मार्च 1978 को जमालपुर गोगरी स्थित धर्मशाला प्रांगण में बिहार लोहिया विचार मंच के तत्त्ववावधान में लोहिया जयंती समारोह का आयोजन किया था, जिसमें मुख्य अतिथि और उद्घाटन कर्ता के रूप में बिहार के चर्चित व लोकप्रिय युवा नेता को आमंत्रित किया था, जिसकी स्वीकृति पत्र उन्होंने मुझे भेजी थी। सबसे दिलचस्प बातें यह है कि महेशखूंट में उन्हें जमालपुर गोगरी के लिए टमटम समय पर नहीं मिला। फ़िर भी समारोह में सही समय पर पहुंचने के लिए नीतीश कुमार जी पांव पैदल ही लोहिया जयंती समारोह स्थल पर पहुंच गए थे। यह इस बात दर्शाता है कि नीतीश कुमार जो कहते हैं, वो कर दिखाते हैं। नीतीश कुमार द्वारा लिखा गया मेरे नाम पत्र 48 वर्षों तक मेरे पास सुरक्षित है, जिसे देखकर मैं भी अपने कार्य कलापों में कोशिश करता हूं कि नीतीश कुमार की ही तरह मैं भी कथनी और करनी में अंतर नहीं रखूं। आजतक इसी सिद्धांत पर कायम रहकर विगत 35 वर्षों तक भारत सरकार के संचार मंत्रालयाधीन भारतीय डाक विभाग में कार्य कर वर्ष 2017 में अवकाश ग्रहण किया। अब, मुख्य रूप से लेखन, पत्रकारिता और समाज सेवा कर रहा हूं। आजतक किसी भी राजनीतिक पार्टी की सदस्यता ग्रहण नहीं किया। सिर्फ़ सामाजिक कार्यों में ही दिलचस्पी लेकर मानव की सेवा कर रहा हूं, निःस्वार्थ भाव से। आजतक मैं ने सरकार से किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं लिया।

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