… … ” हिट कर गई अमित और सुमित की जोड़ी ” चर्चा जोरों पर

एसडीओ अमित, एसडीपीओ सुमित आमलोगों के चहेते बने

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अमित अनुराग, अनुमंडल पदाधिकारी, खगड़िया

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एसडीओ अमित, एसडीपीओ सुमित आमलोगों के चहेते बने

ANA/Arvind Verma

अरविन्द वर्मा

खगड़िया। एसडीओ अमित और एसडीपीओ सुमित की जोड़ी की चर्चा आमलोगों की जुबान पर अच्छी तरह से बैठ गया। कारण है – आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान हेतु हमेशा तत्पर रहना। हर विषम परिस्थितियों के समय हमेशा ऐक्शन मोड में स्पॉट पर उपस्थित रहना, ज़िला पदाधिकारी डॉ आलोक रंजन घोष तथा आरक्षी अधीक्षक अमितेश कुमार के दिशा निर्देशों का अक्षरशः

सुमित कुमार, आरक्षी अनुमंडल पदाधिकारी, खगड़िया

पालन करना आदि। अमित सुमित की जोड़ी देख, कुछ माफिया किस्म के लोगों को अच्छा नहीं लगा। जब दोनों प्रशासनिक अधिकारी हैं, कड़ा ऐक्शन लेंगे तो किसी कांड में संलिप्त लोगों को कैसे अच्छा लगेगा ? कुछ महीने की ही बात है शहर में अतिक्रमण हटाने के क्रम में भी अमित सुमित जोड़ी खूब ख्याति प्राप्त की थी। पूरी पारदर्शिता के साथ दोनों अधिकारी अतिक्रमण हटाने का काम किए थे। लाजमी है जिनका घर, छज्जा, बोर्ड आदि टूटा उन्हें अपार कष्ट हुआ होगा। मगर आम जनता खुश थी। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तो यहां तक कह दिया था कि “नयका एसडीओ, लगै छै सन्तोष मैथ्यू आय गेलै”। अमित अनुराग, एसडीओ ने गौशाला प्रबंधन समिति के सदस्यों को और अधिक सक्रिय किया और प्रबंधन को विकसित किया। विगत दिनों, सन्हौली दुर्गा विसर्जन को लेकर हुए तथाकथित हंगामे के पीछे का तथ्य क्या है, शहर ही नहीं पूरे ज़िले की जनता अच्छी तरह से वाकिफ हो चुकी। धर्म की आड़ में राजनीति की रोटी सेंकने वाले नेताओं की पोल ही खुल गई। फिर अमित और सुमित की जोड़ी हिट कर गई। वास्तविकता जानकर गुमराह हुए लोग नेताओं के प्रति छी छी करने लगे। ज़िले में अमन चैन और शांति चाहने वाले तमाम लोगों को चाहिए कि ज़िला प्रशासन हो या पुलिस प्रशासन, इनके सभी अधिकारियों को स्वतंत्र रुप से कार्य करने देना चाहिए। सिर्फ अपनी स्वार्थ सिद्धि के लिए लोगों को दिग्भ्रमित और गुमराह नहीं करनी चाहिए। प्रशासन किसी खास व्यक्ति के लिए नहीं वरन सबों के लिए है। इस प्रकार अमित और सुमित की जोड़ी आमलोगों के बन गए चहेते।

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