डॉ स्वामीनंदन पर डाक विभाग ने जारी किया डाक टिकट व लिफाफा

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डॉ स्वामीनंदन पर डाक विभाग ने किया डाक टिकट व लिफाफा

ANA/Gaurav Verma

पटना। सुप्रसिद्ध चिकित्सक रहे डॉ. स्वामीनंदन पर स्थानीय मेघदूत भवन में एक विशेष लिफाफा एवं स्टाम्प जारी किया 9गया। इस समारोह में पूर्व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सी. पी. ठाकुर, बिहार के चीफ पोस्टमास्टर जनरल अनिल कुमार तथा पोस्टमास्टर जनरल पूर्वी प्रक्षेत्र अनिल कुमार ने संयुक्त रूप से डॉ. स्वामीनंदन पर एक विशेष लिफाफा एवं स्टाम्प जारी किया। यह कार्यक्रम डॉ. स्वामीनंदन की जन्मशताब्दी के अवसर पर आयोजित की गयी थी। इस अवसर पर डॉ. स्वामीनंदन के पुत्र राजनंदन प्रसाद भी उपस्थित थे।
डॉ. स्वामीनंदन को 1970 के दशक में मेडिसीन के क्षेत्र में चार प्रमुख विभागों के सफल दायित्व के निर्वहन का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। उस समय वे पटना मेडिकल कॉलेज के मेडिकल डिविजन के चेयरमैन पद के साथ साथ पटना मेडिकल कॉलेज में मेडिसीन विभाग के विभागाध्यक्ष] मेडिसीन के डीन फेकल्टी तथा इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान के निदेशक के पद पर पदस्थापित थे। उन्हें मानव कल्याण के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने के लिए प्रसिद्ध ”धनवंतरी सम्मान” से भी सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. प्रसाद 1958 में आईएमए, बिहार के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इस अवसर पर बोलते हुए पूर्व केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. सी. पी. ठाकुर ने कहा कि वे हमारे शिक्षक भी रह चुके हैं और मुक्षे इस बात का गर्व है कि मुक्षे ऐसी महान विभूति की डाक टिकट एवं लिफाफा जारी करने का सौभाग्य प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसी महान व्यक्ति को सम्मानित करना, किसी ऐतिहासिक जगह, सांस्कृतिक धरोहर या घटना को यादगार बनाता है। इस अवसर पर बोलते हुए चीफ पोस्टमास्टर जनरल अनिल कुमार ने कहा कि विशेष लिफाफे के माध्यम से चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाया गया है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, पोस्टमास्टर जनरल पूर्वी प्रक्षेत्र अनिल कुमार ने कहा कि डॉ. स्वामीनंदन मेडिकल के क्षेत्र में बिहार का नाम रौशन किया है, वे ऐसे चिकित्सक थे कि रोगियों के नब्ज पकड़ कर उनकी बीमारी पता कर लेते थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने मेडिकल कॉलेज में व्यस्तता के बावजूद,गरीब रोगियों के लिए प्रतिदिन एक घंटे समर्पित किया। मौके पर बोलते हुए डॉ. स्वामीनंदन के पुत्र राजनंदन प्रसाद ने कहा कि अपने पिता पर डाक विभाग द्वारा दिया गया यह सम्मान हमारे एवं हमारे पूरे परिवार के लिए गर्व कि विषय है। गौरतलब है कि डॉ. स्वामीनंदन का निधन 9 अप्रैल 1983 को हुआ था।

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