रासायनिक खाद से उगाए अनाज एवं फल सब्जियों के माध्यम खा रहे हैं जहर – नर्मदेश्वर लाल, प्रधान सचिव, कृषि

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रासायनिक खाद से उगाए अनाज एवं फल सब्जियों के माध्यम खा रहे हैं जहर – नर्मदेश्वर लाल, प्रधान सचिव, कृषि

ANA/Arvind Verma 

पटना। प्रधान सचिव, कृषि विभाग, बिहार नर्मदेश्वर लाल की अध्यक्षता में आज कृषि भवन, पटना के आडिटोरियम में बिहार राज्य में जैविक उत्पादन की संभावना, लोकसमस्याएँ एवं समाधन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन कलकिया गया। प्रधान सचिव, कृषि विभाग नर्मदेश्वर लाल नेे कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि रासायनिक तरीके से उगाए गए अनाज और फल-सब्जियों के माध्यम से हम जहर खा रहे हैं। इससे कैंसर जैसी घातक बीमारियां हो रहीउ हैं। सरकार का प्रयास है कि प्राकृतिक तरीके से खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि लोगों को शुद्ध उत्पाद मिल सकें। हमें समझना होगा कि जैविक उत्पाद हमारे बेहतर जीवन के लिए जरूरी हैं। प्रधान सचिव ने कहा कि बाजार में जैविक उत्पाद मिल नहीं पा रहे हैं। यदि मिल भी रहे हैं, तो उन पर भरोसा करना मुश्किल है। इसे देखते हुए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है। जैविक उत्पाद महंगे होने के बावजूद स्वास्थ्य के लिए जरूरी हैं और फायदेमंद साबित होते हैं। जैविक उत्पादन को कैसे बढ़ाया जाए, इसके लिए प्रयास किए जाएंगे। साथ ही, सही प्रमाणित (सर्टिफाइड) जैविक उत्पाद उपलब्ध कराना हमारा लक्ष्य है। इस कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों और जैविक खेती करने वाले किसानों ने अपनी उपलब्धियों और सुझावों को साझा किया। इस दौरान कृषि विभाग के विशेष सचिव डॉ॰ बीरेंद्र प्रसाद यादव, कृषि निदेशक श्री सौरभ सुमन यादव, अपर सचिव श्रीमती कल्पना कुमारी सहित विभाग के वरीय अधिकारी मौजूद थे। कार्यशाला में राज्य के विभिन्न हिस्सों आए किसानों ने अपने विचार और सुझाव साझा किए। वैशाली से आए किसान कामेश्वर सिंह कुशवाहा ने कहा कि जैविक खेती में शुरुआत में उत्पादन कम होता है, लेकिन अगले दो-तीन वर्षों में उत्पादन बढ़ने लगता है। साथ ही, उत्पादित फसलों का अधिक मूल्य मिलता है। उन्होंने बताया कि देश के 11 राज्यों में वे अपने उत्पाद बेचकर लाभ कमा रहे हैं। वहीं सारण से आए नर्मदेश्वर गिरी ने कहा कि वे एक साथ कई फसलों की जैविक खेती करते हैं, जो आपस में प्रतिस्पर्धा नहीं करतीं और अधिक उत्पादन देती हैं। वैशाली से आए नवीन कुमार सिंह ने सोशल मीडिया पर इसके प्रचार-प्रसार और सरकारी सहयोग की मांग की। इस कार्यशाला में सिवान के किसान अंकित कुमार, सारण से आए रंजीत कुमार सिंह समेत कई किसानों ने अपनी बात रखी।

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