विक्रमशिला सेतु का संपर्क टूटा, गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़

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विक्रमशिला सेतु का संपर्क टूटा, गंगा घाटों पर उमड़ी भीड़

पाया संख्या 133 के पास क्षतिग्रस्त हिस्सा नदी में समाया,

अगुवानी-सुल्तानगंज के बीच नाव बनी सहारा

ANA/S.K.Verma 

परबत्ता। विक्रमशिला सेतु के पाया संख्या 133 के पास बने गैप का हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त होकर गंगा नदी में समाहित हो जाने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद खगड़िया-भागलपुर के बीच आवाजाही करने वाले हजारों यात्रियों की परेशानी अचानक बढ़ गई है। सेतु मार्ग बंद होते ही परबत्ता प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत अगुवानी -सुल्तानगंज lगंगा घाट पर नौका यात्रा के जरिए आवागमन शुरू हो गया, जहां यात्रियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से ही अगुवानी घाट पर यात्रियों का हुजूम देखा गया। जरूरी कामकाज, इलाज, नौकरी और व्यवसायिक गतिविधियों के लिए लोगों को घंटों घाट पर नाव का इंतजार करना पड़ा। स्थिति यह रही कि कई नावों पर क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाकर गंगा पार कराया गया, जिससे हादसे की आशंका भी गहराने लगी है। प्रशासनिक निगरानी के अभाव में ओवरलोड नौकाओं का संचालन लोगों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा साबित हो रहा है।
स्थानीय ग्रामीण सतीश मिश्रा, राजीव कुंवर और कुनकुन साह ने बताया कि विक्रमशिला सेतु के रास्ते जो यात्रा कभी सहज और सुगम थी, वह अब दुर्लभ हो गई है। अचानक पुल मार्ग बाधित होने से आम लोगों को भारी आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। खासकर छात्र, मरीज और रोजाना सफर करने वाले कामगार सबसे अधिक प्रभावित हैं। वहीं दूसरी ओर नौका संचालकों और व्यवस्थापकों की बल्ले-बल्ले हो गई है। यात्रियों की भीड़ बढ़ने से घाट पर नावों का परिचालन तेज हो गया है और किराए में भी मनमानी की शिकायतें सामने आने लगी हैं। स्थानीय लोगों ने बिहार सरकार और संबंधित विभाग से विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त हिस्से की अविलंब मरम्मत कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराया गया तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी अपील की है।

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